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देवकी – ‘जा कर समझाओ-बुझाओ और क्या करोगे। उनसे कहो, भैया, हमारा डोंगा क्यों मझधार में डुबाए देते हो। तुम घर के लड़के हो। तुमसे हमें ऐसी आशा न थी। देखो कहते क्या हैं।’ देवकी – ‘आखिर क्यों? कोई हरज है?’ देवकी ने इस आपत्ति का महत्व नहीं समझा। बोली…..
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